Tuesday, November 10, 2009

छेत्रबाद एक समस्या या वरदान

मैं आपसभी को गाँधी जी के स्वराज आल्दोलन की याद दिलाना चाहता हूँ। मैं कल महाराष्ट्र में हुए घटना क्रम से दुखी तो जरूर हूँ , लेकिन मेरा मानना है की हर बुरे बात में भी आप एक सही बात निकल सकतें हैं। मैं फिर से आपको स्वराज के तरफ़ ले जा रहा हूँ, यदि हमारे प्रदेश के लोग अपने जरूरत के वस्तु को अपने प्रदेश के उद्दमी द्वारा उत्त्पादित पर निर्भरता को बढ़एं तो यह छेत्रबाद एक वरदान में बदल जाएगा। इसका फायदा यह होगा की जो कंपनी अपना माल हमारे प्रदेश में अपना माल बेचना चाहती है, बह अपना ऑफिस या फैक्ट्री हमारे यहाँ अस्थापित करें। हमारे लोगो को रोजगार मिलेगा। लोग ये भूल जातें हैं की उनके लोगो द्वारा उत्पादित मॉल उनके प्रदेश में कोम्सुमे नही होता है। लाइफ सेविंग drug को छोरकर ऐसी कोई भी वस्तु नहीं है जिसके बिना हमलोग नही रह सकते हैं। मैं उनके प्रोडक्ट के बहिस्कार की राय तो नहीं दूँगा, लेकिन अपने लोगो से बैसे प्रोडक्ट के उपयोग में कमी लेन का सलाह जरूर दूँगा जिसमे मुंबई लिखा हो। साथ ही अपने उद्यमी भाईओं से बैसे प्रोडक्ट को अपने प्रदेश में बनने का आग्रह जरूर करूंगा। इस छेत्रबाद को वरदान बनाना आप लोगो के पास है। Gandhi Said "Power resides in the people , they can use it at any time". मेरा उद्देश्य छेत्रिय भाबना को भार्काना नही अपितु लोगो की सहनशीलता, परिश्रम को परिणाम (फल) में बदलने का है।

Tuesday, November 3, 2009

कैपिटल रीफोर्म

हमलोग हमेसा से लैंड रीफोर्म की बात सुनते हैं , क्या कभी आपने कैपिटल रिफोर्म के बारे में सुना है कितने ऐसे किसान होंगे जिनके पास ५ करोर से ज्यादा की जमीन होगी, इसे काउंट करने में आपको परेशानी होगी लेकिन कितने ऐसे राजनेता , व्यापारी , नौकरिपेसा लोग होंगे जिनकी संपत्ति ५ करोर से ज्यादा होगी, इसका सायद आप अनुमान भी नही लगा सकते हैं। अब आप बताएं रिफोर्म की जरुरत कहाँ है। किसान का लोन माफ़ करने में सरकार को ६० हज़ार करोर का खर्च करने के लिए बैंक को ३ बरस की समय सीमा तय करना परा। लेकिन टेलिकॉम में ऐ राजा को उतने पैसे का घोटाला करने में कितना समय लगा, आपको मालूम है। आपको मेरा बिचार में हो सकता है मर्क्स्बाद नजर आए, पर ऐसा नही है । मैं भी एक किसान का बेटा हूँ और किसान का दर्द व्यान करने की कोसिस कर रहा हूँ।

Thursday, October 29, 2009

असामाजिक न्याय

क्या कोई न्याय असामाजिक हो सकता है, और यदि यह असामाजिक होगा तो न्याय कैसे हो सकता है।