मैं आपसभी को गाँधी जी के स्वराज आल्दोलन की याद दिलाना चाहता हूँ। मैं कल महाराष्ट्र में हुए घटना क्रम से दुखी तो जरूर हूँ , लेकिन मेरा मानना है की हर बुरे बात में भी आप एक सही बात निकल सकतें हैं। मैं फिर से आपको स्वराज के तरफ़ ले जा रहा हूँ, यदि हमारे प्रदेश के लोग अपने जरूरत के वस्तु को अपने प्रदेश के उद्दमी द्वारा उत्त्पादित पर निर्भरता को बढ़एं तो यह छेत्रबाद एक वरदान में बदल जाएगा। इसका फायदा यह होगा की जो कंपनी अपना माल हमारे प्रदेश में अपना माल बेचना चाहती है, बह अपना ऑफिस या फैक्ट्री हमारे यहाँ अस्थापित करें। हमारे लोगो को रोजगार मिलेगा। लोग ये भूल जातें हैं की उनके लोगो द्वारा उत्पादित मॉल उनके प्रदेश में कोम्सुमे नही होता है। लाइफ सेविंग drug को छोरकर ऐसी कोई भी वस्तु नहीं है जिसके बिना हमलोग नही रह सकते हैं। मैं उनके प्रोडक्ट के बहिस्कार की राय तो नहीं दूँगा, लेकिन अपने लोगो से बैसे प्रोडक्ट के उपयोग में कमी लेन का सलाह जरूर दूँगा जिसमे मुंबई लिखा हो। साथ ही अपने उद्यमी भाईओं से बैसे प्रोडक्ट को अपने प्रदेश में बनने का आग्रह जरूर करूंगा। इस छेत्रबाद को वरदान बनाना आप लोगो के पास है। Gandhi Said "Power resides in the people , they can use it at any time". मेरा उद्देश्य छेत्रिय भाबना को भार्काना नही अपितु लोगो की सहनशीलता, परिश्रम को परिणाम (फल) में बदलने का है।
भारत एक ऐसा राष्ट्र है जिसके अन्दर महाराष्ट्र है
ReplyDeleteमराठियों का सम्मान कैसे जब वहां ठाकरे राज है।
लगाया आग क्षेत्रवाद का फिर से जलने के लिए
टुटा मेरा सपना अखंड भारत पर मरने के लिए।
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सभी युवाओं से अपील है अपनी बौद्धिक शक्तियों को पहचाने. अपने राज्य में संगठित रह कर वैश्विक स्तर पर उधोगीकरण के रास्ते खोले.
जय हिंद.